वाशीकरण मंत्र का प्रभाव और कुछ वाशीकरण मंत्र

वाशीकरण के जन्त्र यन्त्र कl ही अपप्रश स्वरूप हैं। पजाबी बोलचाल की भाषा मे मंत्र और यन्त्र को जन्तर कहते है। उर्दू या मुस्लिम बोलचाल की भाषा मे इसी यन्त्र को ताबीज कहते है। प्रागैिहासिक काल से ही मानव किसी रूप मे वाशीकरण मंत्र और ताबिज प्रयोग करता चला आ रहा है। आज तक मानव स्य सुर्य की रोशनी से ले कर बिजली चमकने, तूफान, वषा एंव बिमारी तक घटना उसे चमत्कार लगती थी। इससे डरता भी था और चाहता भी था कि किसी तरह वह इस चमत्कार के बुरे प्रभाव से बचा रहे। मानव सिर्फ अपने को ही नही वरना अपनी पत्नी, बच्चे यहां तक कि अपने पूरे समूह को तरह से तिलस्मी प्राकितिक प्रकोपो एवं अशुभ की अंशका से बचना चाहता है। अाज से 300 साल पहले प्राजीन मेसोपोटामिया में बसे लोगों का इन वाशीकरण मंत्र और ताबिजों मे बेहद विशवास था। कुछ वाशीकरण मंत्र जेसे की

  1. क्षेत्रपाल की सिदु मंत्र

ऊँ क्षं क्षेत्रपाल नम: ।

प्रयोग विधि:  उकत मंत्र का एक लाख बार जाप करने से यह मंत्र सिदु होता है। ताम्रपत्र पर क्षेत्रपाल की प्रतिमा बनाकर उस पर जलधारा दूध का प्रवाह करते हुए उकत मंत्र का जाप करना चाहिए।

  1. शक्ति विनायक मंत्र

ऊँ ह्रीं ग्रीं ह्रीं ।

प्रयोग विधि: उकत मंत्र का पाँच लाख बार जाप करने से यह मंत्र सिदु होता है। इसके सिद्ध होने से आर्थिक उन्नति के साथ-साथ सम्मान, धन- धान्य, यश किती की सिद्धि होती है।

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